Arijit Singh - कभी जो बादल बरसे

Hindi

कभी जो बादल बरसे

कभी जो बादल बरसे
मैं देखूं तुझे आँखें भर के
तू लगे मुझे पहली बारिश की दुआ
 
तेरे पहलू में रह लूं
मैं ख़ुद को पागल कह लूं
तू ग़म दे या ख़ुशियाँ सह लूं साथिया
 
कोई नहीं तेरे सिवा मेरा यहाँ
मंज़िलें हैं मेरी तो सब यहाँ
मिटा दे सभी आजा फ़ासले
मैं चाहूँ मुझे मुझसे बाँट ले
ज़रा सा मुझमें तू झाँक ले
मैं हूँ क्या
 
पहले कभी ना तूने मुझे ग़म दिया
फिर मुझे क्यूँ तन्हा कर दिया
गुज़ारे थे जो लम्हें प्यार के
हमेशा तुझे अपना मान के
तो फिर तूने बदली क्यूँ अदा
ये क्यूँ किया
 
कभी जो बादल बरसे...
मैं देखूं तुझे आँखें भर के
तू लगे मुझे पहली बारिश की दुआ
 
तेरे पहलू में रह लूं
मैं ख़ुद को पागल कह लूं
तू ग़म दे या ख़ुशियाँ सह लूं साथिया
 
Submitted by sandring on Sat, 09/11/2013 - 17:25
Last edited by Alexander Laskavtsev on Tue, 13/12/2016 - 09:28
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