Mat Ja Mere Bachpan (मत जा मेरे बचपन) (लिप्यंतरण)

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Mat Ja Mere Bachpan (मत जा मेरे बचपन)

मत जा, मत जा, मत जा, मेरे बचपन नादां
बचपन ने कहा मुझसे, कुछ रोज़ के हम मेहमां
 
जब से ये रुत मतवाली आई है मेरे आँगन
कहते है के जैसे नैना रूठा रहता है मन
अपने रूठे मनको मैं लेकर जाऊँ कहा
 
कल रात उचट गयी निंदिया और भोर तलक मैं जागी
ये कैसी मीठी अग्नि जो मेरे तन में लगी
कर दे ना मुझे पागल मेरे नटखट अरमां
 
क्यू लाज लगी है सबसे, क्यू सबसे छुपती फिरू
कोई भी नही है ऐसा, हाल अपना जिससे कहु
नादानी मेरी देखो सबको समझू नादां
 
आख़िरी बार शनि, 28/01/2017 - 13:04 को SaintMarkSaintMark द्वारा संपादित
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Mat Ja Mere Bachpan

mat jaa, mat jaa, mat jaa, mere bachapan naadaan
bachapan ne kahaa mujhase, kuchh roj ke ham mehamaan
 
jab se ye rut matawaalee aai hai mere aaangan
kahate hai ke jaise nainaa roothhaa rahataa hai man
apane roothhe manako main lekar jaaooan kahaa
 
kal raat uchat gayee nindiyaa aur bhor talak main jaagee
ye kaisee meethhee agni jo mere tan men lagee
kar de naa mujhe paagal mere natakhat aramaan
 
kyoo laaj lagee hai sabase, kyoo sabase chhupatee firoo
koi bhee nahee hai aisaa, haal apanaa jisase kahu
naadaanee meree dekho sabako samajhoo naadaan
 
अतिथिअतिथि द्वारा सोम, 11/08/2014 - 12:44 को जमा किया गया
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