• Charles Baudelaire

    Au lecteur

    traduzione in Hindi

Condividere
Font Size
Francese
Testi originali

Au lecteur

La sottise, l'erreur, le péché, la lésine,
Occupent nos esprits et travaillent nos corps,
Et nous alimentons nos aimables remords,
Comme les mendiants nourrissent leur vermine.
 
Nos péchés sont têtus, nos repentirs sont lâches ;
Nous nous faisons payer grassement nos aveux,
Et nous rentrons gaiement dans le chemin bourbeux,
Croyant par de vils pleurs laver toutes nos taches.
 
Sur l'oreiller du mal c'est Satan Trismégiste
Qui berce longuement notre esprit enchanté,
Et le riche métal de notre volonté
Est tout vaporisé par ce savant chimiste.
 
C'est le Diable qui tient les fils qui nous remuent !
Aux objets répugnants nous trouvons des appas ;
Chaque jour vers l'Enfer nous descendons d'un pas,
Sans horreur, à travers des ténèbres qui puent.
 
Ainsi qu'un débauché pauvre qui baise et mange
Le sein martyrisé d'une antique catin,
Nous volons au passage un plaisir clandestin
Que nous pressons bien fort comme une vieille orange.
 
Serré, fourmillant, comme un million d'helminthes,
Dans nos cerveaux ribote un peuple de Démons,
Et, quand nous respirons, la Mort dans nos poumons
Descend, fleuve invisible, avec de sourdes plaintes.
 
Si le viol, le poison, le poignard, l'incendie,
N'ont pas encor brodé de leurs plaisants dessins
Le canevas banal de nos piteux destins,
C'est que notre âme, hélas ! n'est pas assez hardie.
 
Mais parmi les chacals, les panthères, les lices,
Les singes, les scorpions, les vautours, les serpents,
Les monstres glapissants, hurlants, grognants, rampants,
Dans la ménagerie infâme de nos vices,
 
Il en est un plus laid, plus méchant, plus immonde !
Quoiqu'il ne pousse ni grands gestes ni grands cris,
Il ferait volontiers de la terre un débris
Et dans un bâillement avalerait le monde ;
 
C'est l'Ennui ! - l'oeil chargé d'un pleur involontaire,
Il rêve d'échafauds en fumant son houka.
Tu le connais, lecteur, ce monstre délicat,
- Hypocrite lecteur, - mon semblable, - mon frère !
 
Hindi
Traduzione

पाठक को संबोधित

मूर्खता, कपट, पाप, लालसा
हमारे मन को संचालित करते हैं और हमारे शरीर को दुर्बल कर रहे हैं,
और हम बेअसर पछतावे से लगातार अपने मन का पालन पोषण कर रहे हैं जैसे खुजली ग्रस्त भिखारी अपने शरीर पर कीटाणु पालते हैं।
 
हमारे पाप हठी हैं, हमारे पश्चाताप में दम नहीं; 
हम अपनी कमजोर प्रतिज्ञायों की कुछ ज्यादा ही कीमत आंकते हैं। यह समझ कर कि हमारे आंँसुओऺ से हमारे गुनाहों की सज़ा खत्म हो गई है, हम और बढ़े गुनाहों की तरफ खिंचे चले जाते हैं । घूम फिर कर हम वही करते रहते हैं जिसे न करने की हम कसमें खाते हैं ।
 
हम बुराई के पालने में पड़े हैं और महान जादूगर शैतान
हमारी आत्माओं को झुला रहा है और हम उसके सामने बेबस हैं
और हमारी इच्छा शक्ति का महान धातु 
इस बुद्धिमान कीमियागर द्वारा पूरी तरह से वाष्पीकृत हो गया है।
 
शैतान के हाथ में हमारी डोर है । वह अपनी इच्छा से हमें घुमाता रहता है।  
प्रतिकूल चीज़ों में हम आकर्षण खोजते हैं और शैतान हमारे कदमों को हर दिन नर्क की तरफ धकेलता रहता है। बिना खौफ हम बदबूदार भयानक जगहों से गुजर जाते हैं
 
जैसे एक वासनापूर्ण कंगाल भिखमऺगा बूढ़ी वेश्या के क्षति ग्रस्त और मुरझाए स्तनों को चूम कर और दांतों से काट कर वेदना पहुंचाता है, वैसे ही हम हर जगह से गुप्त विलासों को चुराते हैं और ऐसे निचोड़ते हैं जैसे सूखे हुए संतरो से जोर लगा कर बचा खुचा रस निकाला जाता है।
 
हमारे दिमाग में पूरे दल बल से कीट पतंगों के छत्ते की तरह
राक्षसों की सेना मौजूद है
और जब हम सांस लेते हैं तो हमारे फेफड़ों से
मौत की एक अनदेखी नदी विलाप करती हुई चल निकलती है।
 
यदि बलात्कार, ज़हर, खंजर , आगजनी
अभी तक हमारी जिंदगी के
नीरस कैनवस पर सुखद चित्र नहीं बन सके
तो केवल इसलिए क्योंकि हममें इतना दम नहीं
 
लेकिन गीदड़, तेंदुए, शिकारी कुत्ते
वानर, बिच्छू, गिद्ध, साँप,
राक्षसों जैसी भयानक शक्लें बना कर गुर्राते है,उमेठते है, कलोलते हैं, रेंगते है
हमारे अँदर के पापों के चिड़याघर में
 
हमारे अंदर इनके अलावा एक और कहीं ज़्यादा बदसूरत, कहीं अधिक दुष्ट चीज़ है
जो न रेंगती है, न गुर्राती है, न चीखती है
वह स्वेच्छा से पृथ्वी को एक झटका देकर मलबा बना सकती है
और, एक जंभाई में, दुनिया को निगल सकती है ।
 
वह ऊब (बोरियत) है! उसकी आँखों में आँसू हैं जो वह दबा नहीं सकती । वह हुक्का पीते हुए फांसी की टिकठी का स्वपन लेती है।
लगता है तुम इस परिष्कृत दैत्य को जानते हो
ढोंगी पाठक, मेरे हमराह, मेरे भाई ।
 
Traduzioni di “Au lecteur”
Italiano #1, #2
Cinese #1, #2
Croato #1, #2
Hindi
Inglese #1, #2, #3, #4, #5, #6
Rumeno #1, #2
Spagnolo #1, #2, #3
Tedesco #1, #2
Commenti
Surinder JathaulSurinder Jathaul    Mer, 09/05/2018 - 04:04

Quel exploit ! Il y a de quoi le signaler au Directeur de l’Alliance française, M, Sylvain CHOIN, puis à M, Alexandre ZIEGLER Ambassadeur de France en Inde.

Ramesh MehtaRamesh Mehta
   Dom, 27/05/2018 - 08:06

Je ne connais pas la valeur de ma traduction. Je ne suis qu'un débutant dans le domaine. Peu importe les traductions que je fais, c'est juste par amour pour les super chansons. Je suis en train de préparer le terrain pour que les personnes talentueuses puissent se présenter et faire les traductions en hindi de toutes les chansons du site lyricstranslate.